पितृ दोष निवारण एवं श्राद्ध के बारे में
पितृ दोष पूजा में तर्पण (तिल सहित जल अर्पण), पिंडदान, पितृ गायत्री पाठ और ब्राह्मण भोजन द्वारा दिवंगत पूर्वजों का सम्मान किया जाता है। यह पूर्वजों के आशीर्वाद के लिए और शेष श्राद्ध कर्म पूरे करने के लिए की जाती है।
हिंदू परंपरा में वंशजों का कर्तव्य है कि वे अपने पूर्वजों को स्मरण करें, विशेषकर पितृ पक्ष में, जो शारदीय नवरात्रि से पहले के सोलह दिन हैं। जब श्राद्ध कर्म छूट गए हों, या कुंडली में पितृ दोष बताया गया हो, तब यह पूजा बताई जाती है। कुछ परिवार गया, हरिद्वार, वाराणसी या त्र्यंबकेश्वर जाते हैं, और इसे घर पर या नदी तट पर भी किया जा सकता है।
हरिद्वार सेवा सूची से: Removes ancestral curses and brings peace to departed souls.
परिवार यह पूजा क्यों कराते हैं
- तर्पण और श्राद्ध द्वारा पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता
- कुंडली में पितृ दोष होने पर परंपरा से सुझाया जाने वाला उपाय
- घर पर, नदी तट पर या तीर्थ में किया जा सकता है
- परिवार के नाम से ब्राह्मण भोजन और दान सम्मिलित
पूजा विधि, चरण दर चरण
संकल्प
गोत्र और स्मरण किए जाने वाले पूर्वजों के नाम के साथ संकल्प लिया जाता है।
गणेश और विष्णु पूजा
कर्म आरंभ करने के लिए गणेश जी और भगवान विष्णु का पूजन होता है।
तर्पण
काले तिल और कुश सहित जल पूर्वजों को अर्पित किया जाता है।
पिंडदान
चावल, तिल और घी के पिंड मंत्रों के साथ अर्पित किए जाते हैं।
पितृ गायत्री पाठ
पितृ गायत्री और संबंधित मंत्रों का पाठ होता है।
ब्राह्मण भोजन और दान
ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और पूर्वजों के नाम से दान दिया जाता है।
सामान्यतः आवश्यक सामग्री
आप कहें तो मैं पूरी किट ले आऊँगा। बुकिंग पक्की होने पर मैं सटीक सूची भेज दूँगा।
- काले तिल, जौ और कुश
- पिंड के लिए चावल, दूध, शहद और घी
- गंगाजल
- सफेद फूल और तुलसी
- जनेऊ और सफेद वस्त्र
- ताँबे या पीतल की थाली और लोटा
- ब्राह्मण भोजन की सामग्री
- केले या साल के पत्ते की पत्तल
- पूर्वजों के नाम और गोत्र का विवरण
- दक्षिणा और दान की वस्तुएँ
उत्तम समय और मुहूर्त
पितृ पक्ष, यानी शारदीय नवरात्रि से पहले के सोलह दिन, मुख्य समय है, जब हर पूर्वज का श्राद्ध उनकी मृत्यु-तिथि पर होता है। सर्वपितृ अमावस्या, हर अमावस्या और पुण्यतिथि भी मान्य हैं। श्राद्ध परंपरा से देर सुबह से दोपहर तक किया जाता है, शाम को नहीं।
बुकिंग पर आपको क्या मिलता है
- अनुभवी वैदिक पंडित द्वारा पूरी पूजा
- आप कहें तो पूजन सामग्री की किट
- मुहूर्त का मार्गदर्शन
- परिवार के लिए हर चरण की व्याख्या
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या महिलाएँ श्राद्ध कर सकती हैं?
पुरुष वंशज न होने पर, या परिवार की सहमति से, महिलाएँ तर्पण और श्राद्ध कर सकती हैं। सही विधि पंडित जी बता देंगे।
क्या मुझे सही तिथि पता होनी चाहिए?
यदि आपको निधन की तारीख पता है तो मैं उसे हिंदू तिथि में बदल दूँगा। यदि नहीं पता, तो सर्वपितृ अमावस्या सभी पूर्वजों के लिए निर्धारित दिन है।



